बिहार के वरिष्ठ नेता Nitish Kumar के राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने के साथ ही राजनीति में एक पुराना किस्सा फिर चर्चा में आ गया है। यह किस्सा 1999 में Atal Bihari Vajpayee सरकार के एक वोट से गिरने से जुड़ा है, जिसमें Giridhar Gamang की भूमिका अहम रही थी।
📅 1999: एक वोट से गिरी थी वाजपेयी सरकार
17 अप्रैल 1999 को वाजपेयी सरकार विश्वास मत में महज एक वोट (269-270) से हार गई थी। उस समय गिरिधर गोमांग ओडिशा के मुख्यमंत्री बन चुके थे, लेकिन उन्होंने लोकसभा की सदस्यता नहीं छोड़ी थी।
मुख्यमंत्री रहते हुए भी वे संसद पहुंचे और अपनी पार्टी के निर्देश पर सरकार के खिलाफ वोट किया। यही एक वोट सरकार गिरने का कारण बना और यह घटना भारतीय राजनीति के इतिहास में दर्ज हो गई।
🗳️ जयललिता और मायावती की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम में J. Jayalalithaa की भूमिका भी अहम मानी जाती है। उनकी पार्टी ने समर्थन वापस लेकर सरकार को कमजोर कर दिया।
वहीं, Mayawati के नेतृत्व वाली बसपा ने भी अंतिम समय में अपना रुख बदलते हुए सरकार के खिलाफ वोट किया, जिससे बीजेपी खेमे को बड़ा झटका लगा।
🤔 अब क्यों हो रही तुलना?
गिरिधर गोमांग का मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि Nitish Kumar ने भी मुख्यमंत्री पद छोड़े बिना ही राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या वे सांसद रहते हुए किसी महत्वपूर्ण संसदीय प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे या पहले पद छोड़ेंगे।
🏛️ बिहार में सियासी हलचल
नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे के बीच बिहार में सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं। नए मुख्यमंत्री के तौर पर Samrat Choudhary का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है।
करीब दो दशकों तक बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभाने के बाद माना जा रहा है कि नीतीश कुमार अब अपनी अगली राजनीतिक पारी दिल्ली में खेलने की तैयारी कर रहे हैं।
🔚 निष्कर्ष
नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण के साथ ही 1999 की वह ऐतिहासिक घटना फिर चर्चा में आ गई है, जिसने एक वोट की ताकत को पूरे देश के सामने रखा था। अब देखना दिलचस्प होगा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में आगे क्या फैसला लिया जाता है।

