नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। थरूर ने दावा किया कि वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और सत्यापन प्रक्रिया में देरी का असर चुनाव परिणामों पर पड़ा, जिससे बीजेपी को फायदा मिला।
वोटर लिस्ट पर उठाए सवाल
अमेरिका में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शशि थरूर ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लाखों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। उनके अनुसार बड़ी संख्या में लोगों ने खुद को वैध मतदाता बताते हुए अपील भी की, लेकिन कई मामलों का समय रहते समाधान नहीं हो सका। थरूर का कहना है कि यदि इन मतदाताओं को मतदान का अवसर मिलता, तो चुनावी तस्वीर अलग हो सकती थी।
‘लोकतांत्रिक निष्पक्षता पर गंभीर सवाल’
थरूर ने कहा कि फर्जी या डुप्लीकेट नाम हटाना जरूरी है, लेकिन यदि वास्तविक मतदाता भी सूची से बाहर हो जाएं, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इस मुद्दे पर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की।
बीजेपी की जीत पर विपक्ष के सवाल
पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद विपक्षी दल लगातार चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। थरूर के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या मतदाता सूची में बदलाव ने चुनावी परिणामों को प्रभावित किया।
केरल का भी दिया उदाहरण
थरूर ने कहा कि केरल में मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हटाने से चुनावी समीकरण बदले, लेकिन वहां इसका असर अलग राजनीतिक दलों पर पड़ा। उनका कहना था कि मतदाता सूची की शुद्धता जरूरी है, लेकिन प्रक्रिया निष्पक्ष और समयबद्ध होनी चाहिए।
चुनावी बहस तेज
थरूर के बयान के बाद बंगाल चुनाव परिणामों और वोटर लिस्ट प्रबंधन को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है। अब निगाहें इस पर हैं कि चुनाव आयोग या संबंधित एजेंसियां इन सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं।

