दिल्ली हाई कोर्ट सख्त: Arvind Kejriwal की जिरह का वीडियो किसने किया अपलोड? कोर्ट ने मांगा जवाब

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नई दिल्ली। Delhi High Court ने पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal से जुड़े एक मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अदालत की कार्यवाही के वीडियो को लेकर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने यह जानने के लिए जांच के दायरे को बढ़ा दिया है कि जिरह का वीडियो सबसे पहले सोशल मीडिया पर किसने अपलोड किया।


⚖️ कोर्ट ने जारी किए नोटिस

मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने Arvind Kejriwal, आम आदमी पार्टी के अन्य नेताओं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Digvijaya Singh और पत्रकार Ravish Kumar को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि संबंधित सभी वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाए जाएं।


📌 नियमों के उल्लंघन पर सख्त टिप्पणी

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह की रिकॉर्डिंग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के तय नियमों का उल्लंघन है और इसे सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर साझा नहीं किया जा सकता।

इस मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को तय की गई है।


🌐 सोशल मीडिया कंपनियों से भी जवाब

सुनवाई के दौरान Meta (फेसबुक-इंस्टाग्राम) और Google (यूट्यूब) के वकीलों ने भी अपना पक्ष रखा।

  • Meta ने बताया कि उनके पास सीधे तौर पर शुरुआती अपलोडर की पहचान करने का कोई त्वरित सिस्टम नहीं है, लेकिन वे यूआरएल और आईपी लॉग जैसी जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं।
  • Google ने कहा कि उन्हें जो लिंक उपलब्ध कराए गए थे, उन्हें प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है।

❗ कोर्ट ने उठाए अहम सवाल

अदालत ने सवाल किया कि सोशल मीडिया कंपनियों को हर बार निर्देश देने की जरूरत क्यों पड़ती है और वे खुद ऐसे कंटेंट को क्यों नहीं हटाते।

इसके जवाब में कंपनियों ने कहा कि वे केवल आधिकारिक निर्देश मिलने पर ही कार्रवाई करते हैं।


🔍 आगे क्या?

कोर्ट ने सभी पक्षों को अगली सुनवाई में पूरी जानकारी के साथ पेश होने का निर्देश दिया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वीडियो सबसे पहले किसने अपलोड किया था।


🔚 निष्कर्ष

Delhi High Court की सख्ती से यह साफ है कि अदालत की कार्यवाही से जुड़े नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जा रहा है। आने वाले समय में इस मामले में और अहम खुलासे हो सकते हैं।

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