नई दिल्ली | DUN – Delhi Update News
राजधानी दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील मामले में सख्त फैसला सुनाते हुए 13 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म और उसे गर्भवती करने के दोषी को 25 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया है और पीड़िता को ₹14.50 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है।
⚖️ कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि जिस घर में एक मासूम को सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वही स्थान विश्वासघात का केंद्र बन गया। अदालत ने इस अपराध को गंभीर मानते हुए कठोर सजा सुनाई।
🔬 DNA रिपोर्ट बनी निर्णायक सबूत
मेडिकल जांच के दौरान यह सामने आया कि नाबालिग पीड़िता गर्भवती थी। इसके बाद फॉरेंसिक जांच के लिए नमूने भेजे गए।
👉 DNA रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि आरोपी ही दोषी है
👉 इसी वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर अदालत ने फैसला सुनाया
📌 जांच में क्या सामने आया?
यह घटना दिल्ली के एक थानाक्षेत्र की है, जहां अक्टूबर 2024 में पीड़िता को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
जांच में सामने आया कि:
- पीड़िता आरोपी को रिश्ते में भाई मानती थी
- वह लंबे समय से आरोपी के घर रह रही थी
- वहीं उसके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया
⚠️ बयान से पलटी पीड़िता
मुकदमे के दौरान पीड़िता अपने पहले दिए गए बयान से पलट गई और आरोपी के पक्ष में बात कही।
👉 इसके बावजूद अदालत ने वैज्ञानिक सबूत (DNA रिपोर्ट) को अधिक विश्वसनीय मानते हुए फैसला दिया।
🏛️ कानूनी धाराएं और सजा
अदालत ने दोषी को:
- POCSO Act की धारा 6
- BNS की धारा 64(2), 65(1)
के तहत दोषी ठहराया और 25 साल की सजा सुनाई।
🎯 निष्कर्ष
यह मामला दिखाता है कि गंभीर अपराधों में वैज्ञानिक सबूत जैसे DNA रिपोर्ट कितने महत्वपूर्ण होते हैं। अदालत का यह फैसला न्याय प्रणाली की सख्ती और संवेदनशीलता को दर्शाता है।

